दास्तान-ए-इश्क (पार्ट -2)
(पिछले पार्ट में हमने पढा कि राघव रेस्त्रां में किसी से मिलने आया था , लेकिन उस व्यक्ति को आने में विलम्ब हो रहा था। इसीलिए राघव बैठे बैठे अपने अतीत में खो गया )
अब आगे ◆ ◆
राघव के अतीत के दृश्य सजीव हो उठे। उसके सामने दीवार पे एक फ़िल्म सी चल पड़ी। कितना मनोहारी दृश्य था , आह!.......
इलाहाबाद राजकीय महाविद्यालय में उसका दूसरा वर्ष था। शायराना अंदाज, हँसमुख चेहरा, खुशदिल व्यक्तित्व ने उसकी कालेज में एक अच्छी पहचान बना दी थी। उसकी हाजिर जबाबी की वजह से बच्चो से लेकर प्रोफेसर्स तक सभी उससे भलीभांति परिचित थे। यही कारण था कि आज स्वतंत्रता दिवस पर होने बाला कार्यक्रम राघव को होस्ट करना था । मानो पूरे कार्यकम की जिम्मेदारी उसके ही सर थी। ध्वजारोहण के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम 10 बजे से प्रारम्भ होना था लेकिन वह तय समय से पहले ही कालेज आ गया था, क्योकि वह कार्यक्रम में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नही चाहता था।
वह सभागार में मंच की तरफ मुंह किये हुये कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की जांच पडताड़ कर रहा था। तभी अचानक से किसी ने जोर से उसके कंधे में धक्का मारा । उसने पीछे मुड़ के देखा, "अरे शीना! तुम कब आयीं।"
चौंकते हुए राघव बोला। "तुम इस दुनिया में रहते भी कहाँ हो, जो पता चले कि कौन आया कौन गया , कौन मरा कौन जिया। अपने ख्यालों में ही इतना खोए रहते हो कि किसी की खबर ही नहीं रहती।" शीना ने शिकायती लहजे में कहा।
राघव थोड़ा झेंपते हुए बोला,"अरे नहीं , ऐसी कोई बात नही हैं। कहिए क्या खिदमत की जाए।" और वह मुस्कुरा दिया।
शीना उत्सुकता से बोली, "मुझे तुम्हे किसी से मिलवाना है।" शीना ने गर्दन थोड़ी सी ऊंची उठाकर उंगली से पीछे की बेंच पर इशारा किया और बोली, "यह प्रिंसी है मेरी दोस्त। इसे भी कार्यक्रम में हिस्सा लेना है, इसका नाम लिस्ट में लिख लो प्लीज!" ऐसे किसी का भी नाम येन मौके पे लिस्ट में बढ़ाना राघव के लिए मुश्किल था, वो भी बिना उसे जाने पहचाने । लेकिन फिर भी शीना के आग्रह या आज्ञा जो भी समझिए, ने प्रिंसी का नाम लिस्ट में बढ़ाने के लिए राघव को मजबूर कर ही दिया ।
राघव और शीना दोस्त थे। अभी कुछ दिनों पहले ही तो इनकी जान पहचान हुई थी। और दोस्ती भी हो गयी थी । तब पता चला कि ये दोनों एक ही क्लास में पढ़ते हैं। हालांकि ये दोस्ती सिर्फ दोस्ती तक ही सीमित थी, जैसे लड़के की लड़के से होती है या लड़की की लड़की से। विल्कुल वैसे ही सामान्य सी दोस्ती । लेकिन कहने बाले इन दोनों के बारे में क्या क्या कहते थे। राघव को इससे कोई फर्क नही पड़ता था। क्योकि कहने बालो का काम होता है कहना, यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा होता है । जब तक कहने बाले किसी के बारे में 2-4 बकैती भरी बातों की पतंगे बना के उड़ा नही लेते उन्हें आराम नही मिलता है । फिर होता है इन पतंगों का पेंच और पतंगे कटती भी हैं, लूटी भी जाती हैं। लूटने बाला उन पतंगों को फिर अपने तरीके से सजा के उड़ाता है , और यही क्रम अनवरत चलता रहता है । बातों की ये पतंगे कभी कटती नहीं है, वल्कि धीरे धीरे इनका स्वरूप बढ़ता जाता है।
लेकिन राघव को पतंगे उड़ाने में कोई दिलचस्पी नही थी । उसका मानना था कि पतंगे उड़ाने से सिर्फ हाथ कटते है।और कुछ हासिल भी नही होता है। इसीलिए राघव को कोई फर्क नही पड़ता था कि कौन उसके बारे में क्या कहता है।
कार्यक्र सफलता पूर्वक भव्य दिव्य तरीके से पूर्ण हुआ । सभी की प्रस्तुतियां सराहनीय थी। प्रिंसी ने भी अच्छा प्रदर्शन किया था। राघव ने अब जाकर चैन की सांस ली, कि उसने प्रिंसी का नाम लिस्ट में बढाकर कोई गलती नही की थी । अब तक शाम के चार बज चुके थे, ज्यादातर बच्चे अपने घर जा चुके थे और गिने चुने तीन चार लोग ही बचे थे। शीना और प्रिंसी दोनों राघव के पास आये, दोनों ने एक साथ उसे शुक्रिया कहा। बदले में राघव ने सिर्फ मुस्कुरा दिया। शीना फिर से प्रिंसी का परिचय कराते हुए बोली--"ये है प्रिंसी ये हमारी.........."। शीना की बात बीच में ही काटते हुए राघव बोला, " अरे बाबा पता है, प्रिंसी है, अपनी क्लास मेट है। कितनी बार बताओगे।" इतना कहकर वह खिलखिलाकर हँस उठ्ठा। राघव ने अपनी कलाई की तरफ़ देखा और बोला , "अच्छा दोस्तो देर हो रही है, अब मैं चलता हूँ कल मिलते हैं।"
राघव ------- बाई ।। बाई।।
और वह हाथ हिलाता हुआ चला गया।
शेष अगले हफ्ते..........
_____©®____ "राज मोहन पाठक"
(क्या हुआ अगले दिन, शीना ,राघव और, प्रिंसी अगले दिन मिले या नहीं। स्वतंत्रता दिवस पे ऐसा क्या हुआ जिसने राघव को सबसे बड़े बंधन में बांध दिया।
इन सब प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए पढिये आगे की दास्तान, अगले हफ्ते।)
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वाह क्या बात है जल्दी से अगला पार्ट लेकर आए भाई आप । मुझे इंतजार हैं 🥰🥰🥰🙂🙂🙏
ReplyDeleteबस समझो आपका इंतजार खत्म हुआ , छुटकी😊😊
Deleteशीघ्र ही अगला पार्ट आएगा , वो भी इससे ज्यादा रोमांचक होगा।
(इस पार्ट में यदि कोई त्रुटि हो गयी हो या कोई सुझाव देना चाहते हो तो पर्सनल चैट में दे सकते हो।।))
धन्यवाद😊
Nice
ReplyDeleteThan ks
Delete👌🏻👌🏻keep it up.
ReplyDeleteबहुत सुंदर भइया
ReplyDeleteआभार....
Deleteशेष भाग भी अवश्य पढियेगा।
आपको अच्छा लगेगा